Dongargarh News: पुलिस की प्रिवेंटिव पुलिसिंग का असर, वारदात से पहले ही संदिग्धों पर कार्रवाई

Chhattisgarh Dongargarh News: डोंगरगढ़। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर डोंगरगढ़ में आयोजित गोविंदा उत्सव इस बार कड़ी पुलिस निगरानी और सख्त सुरक्षा व्यवस्था के चलते शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी और देर रात तक चले आयोजन के बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। पुलिस की पूर्व नियोजित व्यवस्था के चलते गोविंदा उत्सव का आयोजन शांतिपूर्ण रहा, जिसे पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर इस बार पुलिस ने घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित घटनाओं को पहले ही रोकने की रणनीति अपनाई। आयोजन से करीब एक सप्ताह पहले ही सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। आयोजन समितियों, डीजे और साउंड संचालकों सहित संबंधित लोगों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रमुख चौक-चौराहों, शोभायात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया।

पुलिस की अलग-अलग टीमें पूरे आयोजन के दौरान भीड़ के बीच लगातार सक्रिय रहीं। संदिग्ध और असामाजिक तत्वों पर पहले से नजर रखी गई और संभावित वारदात को अंजाम देने से पहले ही कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। भीड़ के बीच तलाशी और निगरानी के दौरान पुलिस ने करीब दो बड़े बोरों में कड़े जब्त किए। इसके अलावा कई धारदार हथियार भी बरामद किए गए। पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट हुआ कि उत्सव की आड़ में उपद्रव या हिंसा की कोशिश करने वालों पर सख्ती बरती गई।

गोविंदा उत्सव से पहले अवैध शराब के कारोबार पर भी पुलिस ने कार्रवाई की। लगातार निगरानी और कार्रवाई के चलते अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने का प्रयास किया गया। पुलिस की सख्ती के कारण शराब के जरिए विवाद या हुड़दंग की आशंका को भी नियंत्रित किया गया। इसका असर आयोजन के माहौल पर दिखाई दिया और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में उत्सव का आनंद लिया।

पूरे आयोजन के लिए 300 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर, एसडीओपी केसरी नंदन नायक, नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन, डीएसपी एंब्रोस कुजूर, केके बाजपेयी, सतानंद विंध्यराज और डीएसपी सुमन जायसवाल सहित जिले के विभिन्न थाना और चौकी प्रभारी लगातार मैदान में मौजूद रहे। पुलिसकर्मियों ने शोभायात्रा मार्ग, प्रमुख चौक-चौराहों और कार्यक्रम स्थलों पर निगरानी रखते हुए भीड़ और यातायात को नियंत्रित किया।

पूरे आयोजन के दौरान एसपी अंकिता शर्मा और डोंगरगढ़ की महिला पुलिस अधिकारी प्रशिक्षु डीएसपी सुमन जायसवाल की मैदानी निगरानी भी विशेष रूप से नजर आई। महिला अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने भीड़ के बीच सक्रिय रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। पुलिस की रणनीति का मूल मंत्र वारदात का इंतजार करने के बजाय वारदात की संभावना को पहले ही खत्म करना रहा।

डोंगरगढ़ धार्मिक और पर्यटन महत्व का शहर है, जहां गोविंदा उत्सव के दौरान आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में हजारों लोगों की भीड़ के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इस बार पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को केवल बल तैनाती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूर्व तैयारी, संदिग्धों की निगरानी, हथियारों की जब्ती, अवैध शराब पर नियंत्रण और लगातार मैदानी पुलिसिंग के जरिए संभावित विवादों को पहले ही रोकने पर जोर दिया। नतीजा यह रहा कि 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़, कई स्थानों पर एक साथ हुए कार्यक्रम, शोभायात्रा और देर रात तक चले उत्सव के बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

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