Arunachal Pradesh Earthquake: अरुणाचल प्रदेश में सुबह-सुबह भूकंप के झटके, 2.9 रही तीव्रता; तिब्बत और अफगानिस्तान भी हिले

Arunachal Pradesh Earthquake:  ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में मंगलवार सुबह हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, बिछोम क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 मापी गई। भूकंप के झटके सुबह 5 बजकर 44 मिनट 15 सेकंड पर महसूस किए गए। हालांकि, भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

10 किलोमीटर की गहराई में था भूकंप का केंद्र

NCS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 27.540 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 92.817 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। भौगोलिक स्थिति के लिहाज से इसका केंद्र तवांग के आसपास के क्षेत्र में बताया जा रहा है।

अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप

इससे पहले सोमवार सुबह अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। NCS के अनुसार, वहां भूकंप की तीव्रता 4.1 रही। भूकंप सुबह करीब 5 बजकर 36 मिनट पर आया था। इसकी गहराई जमीन के भीतर करीब 130 किलोमीटर दर्ज की गई। अधिक गहराई में भूकंप आने के कारण इसके झटके दूर-दराज के इलाकों तक महसूस किए जाने की संभावना रहती है।

तिब्बत में 5.0 तीव्रता से कांपी धरती

इससे पहले तिब्बत में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। NCS के मुताबिक, तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई थी। यह भूकंप दोपहर करीब 1 बजकर 46 मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन के करीब 14 किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया था। NCS के अनुसार, भूकंप का केंद्र 31.479 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 80.370 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। फिलहाल इस भूकंप के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

कैसे आता है भूकंप?

भूकंप धरती की सतह पर अचानक होने वाला कंपन है। इसका मुख्य कारण पृथ्वी के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़े हिस्सों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। ये प्लेटें लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं।

जब प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर होती हैं या एक प्लेट दूसरी के नीचे खिसकती है, तो उनके किनारों पर तनाव जमा होता रहता है। जब यह तनाव अचानक मुक्त होता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। इसी वजह से धरती में कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप के झटकों के रूप में महसूस करते हैं।

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