Gariaband News: जल-जंगल-जमीन पर अधिकार की मांग को लेकर एकजुट हुए 128 गांव, 17 अक्टूबर को कोकड़ी में होगी महा ग्राम सभा

Chhattisgarh Gariaband News: गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विस्थापन की आशंका और नाइट कर्फ्यू को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम मोंगराडीह में जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति सीतानदी उदंती क्षेत्र के बैनर तले आयोजित बैठक में 128 गांवों और पारा-टोलों के ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने विस्थापन का विरोध करते हुए क्षेत्र में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

बैठक में संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम ने कहा कि क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और स्थानीय मूल निवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। समिति ने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से उठाने की बात कही।

जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि 128 गांवों और पारा-टोलों के लोगों के भविष्य को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। उनका कहना है कि विस्थापन के बजाय गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से एकजुट रहने की अपील की। वहीं, समिति के संरक्षक दैनिक राम मंडावी ने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रत्येक गांव से एक युवा, एक बुजुर्ग और एक शिक्षित महिला को जोड़ने की बात कही।

ग्रामीणों ने क्षेत्र में लागू नाइट कर्फ्यू हटाने और वन ग्रामों के किसानों को स्थायी भूमि स्वामी हक देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों को विस्थापन के दबाव के बजाय विकास के अवसर मिलने चाहिए। बैठक में इन मुद्दों को लेकर आगे भी संगठित तरीके से आवाज उठाने पर सहमति बनी।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 17 अक्टूबर को राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में महा ग्राम सभा आयोजित की जाएगी। इसमें कांकेर और महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, सिहावा और बिंद्रानवागढ़ के विधायकों तथा जिला पंचायत अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि ग्रामीण अपनी मांगें सीधे उनके सामने रख सकें।

महा ग्राम सभा की तैयारी के लिए 12 अक्टूबर से समिति के प्रमुख प्रतिनिधियों द्वारा गांवों में जनसंपर्क करने और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करने की योजना बनाई गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि विस्थापन, नाइट कर्फ्यू और भूमि अधिकार से जुड़े मुद्दों पर वे अपनी मांगें आगे भी उठाते रहेंगे।

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