मोहर्रम जुलूसों में डीजे और बैंड पर रोक के आदेश पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक, पढ़ें पूरी खबर

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Chhattisgarh High Court on Moharram: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोहर्रम के अवसर पर निकलने वाले पारंपरिक मजहबी जुलूसों में डीजे, ब्रास बैंड, धुमाल और आतिशबाजी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने ‘सूफी इस्लामिक बोर्ड’ की ओर से दायर रिट याचिका पर त्वरित सुनवाई करते हुए वक्फ बोर्ड द्वारा जारी विवादित नोटिस के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मोहर्रम पर्व से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम पहले से शुरू हो चुके हैं और मुख्य जुलूस 26 जून को प्रस्तावित है। ऐसे समय में प्रतिबंधात्मक आदेश को लागू करने से समाज में असंतोष और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल वक्फ बोर्ड के आदेश के संचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया।

11 जून को जारी हुआ था प्रतिबंधात्मक आदेश

दरअसल, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने 11 जून 2026 को एक आदेश जारी कर राज्य की सभी मोहर्रम कमेटियों और ताजिया आयोजकों को निर्देश दिया था कि जुलूसों के दौरान डीजे, धुमाल, ब्रास बैंड और पटाखों का इस्तेमाल नहीं किया जाए। आदेश में यह भी कहा गया था कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाली समितियों पर 50 हजार रुपये का दंड लगाया जाएगा।

वक्फ बोर्ड के इस आदेश को सूफी इस्लामिक बोर्ड ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि यह आदेश न केवल मनमाना है, बल्कि वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर है।

याचिकाकर्ता ने उठाया अधिकार क्षेत्र का सवाल

सूफी इस्लामिक बोर्ड की ओर से अधिवक्ता देवेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत में दलील दी कि वक्फ बोर्ड को इस प्रकार के दंडात्मक आदेश जारी करने अथवा धार्मिक आयोजनों की पद्धति पर रोक लगाने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। ध्वनि प्रदूषण, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने का दायित्व जिला प्रशासन और पुलिस का होता है, न कि वक्फ बोर्ड का।

उन्होंने यह भी कहा कि मोहर्रम से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं और मुख्य आयोजन से ठीक पहले इस तरह का आदेश लागू करने से समाज में व्यापक असंतोष फैल सकता है।

कोर्ट ने माना, ऐन वक्त पर आदेश लागू करना उचित नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया। अदालत ने माना कि पर्व के आयोजन की तैयारियां पहले से चल रही हैं और इस समय प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक दृष्टि से उचित नहीं होगा। कोर्ट ने आशंका जताई कि इससे सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं रहेगा आदेश

हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक वक्फ बोर्ड का विवादित नोटिस प्रभावी नहीं रहेगा। इसके साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान भी फिलहाल लागू नहीं होगा।

अदालत ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड को अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले महीने निर्धारित की जाएगी। फिलहाल, मोहर्रम के जुलूस पूर्ववत परंपरागत स्वरूप में आयोजित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

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