CG News: राहुल गांधी के दौरे पर केदार कश्यप का कटाक्ष, बोली- जनता को गुमराह नहीं कर पाएगी कांग्रेस

Chhattisgarh News: रायपुर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। वन मंत्री केदार कश्यप ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उनके दौरे को राजनीतिक पिकनिक और महज दिखावा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और नेतृत्व संकट को छिपाने के लिए इस दौरे का इस्तेमाल किया गया।

केदार कश्यप ने कहा कि राहुल गांधी का कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और मिलकर काम करने का संदेश इस बात का संकेत है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उनके मुताबिक पार्टी में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी लंबे समय से बनी हुई है, जिसे छिपाने के लिए बड़े नेताओं के दौरों का सहारा लिया जा रहा है।

वन मंत्री ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को ‘मैगी राजनीति’ की संज्ञा देते हुए कहा कि कांग्रेस के पास भाजपा सरकार की जनहितैषी योजनाओं और विकास कार्यों के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता के बीच वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल मीडिया कवरेज और फोटो अवसरों की राजनीति कर रही है। कश्यप ने दावा किया कि इस तरह की राजनीति से प्रदेश की जनता प्रभावित होने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार राज्य में विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि विपक्ष के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है। ऐसे में कांग्रेस केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रमों और प्रचार पर निर्भर दिखाई दे रही है।

इस बीच राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी की स्थिति बनी हुई है। राहुल गांधी द्वारा कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करने का संदेश दिए जाने को पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान राहुल गांधी एक नूडल्स प्वाइंट पर भी रुके थे, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मैगी और चाय का ऑर्डर दिया था। भाजपा अब इसी प्रसंग को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही है और इसे “मैगी राजनीति” का नाम दे रही है।

राहुल गांधी के दौरे और भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना रह सकता है।

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