MP News: मजबूरी का फायदा; प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के लिए ऑटो चालक ने वसूले 2000 रुपये

MP News: पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति की एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। बृजपुर क्षेत्र के पहाड़ीखेड़ा में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को समय पर न तो एंबुलेंस मिली और न ही अस्पताल में इलाज की सुविधा। सरकारी व्यवस्थाओं की लापरवाही के कारण महिला और उसके परिजनों को घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा।

प्रसव पीड़ा शुरू होते ही मांगी मदद

जानकारी के अनुसार ग्राम उमरी निवासी 25 वर्षीय रोशनी अहिरवार को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। घबराए परिजनों ने तत्काल सरकारी एंबुलेंस सेवा को फोन कर मदद मांगी। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही एंबुलेंस पहुंच जाएगी और महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।

4 घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस

परिजनों का आरोप है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद करीब चार घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। गर्भवती महिला दर्द से तड़पती रही, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। हालात बिगड़ते देख परिवार ने खुद महिला को अस्पताल ले जाने का फैसला किया।

अस्पताल पहुंचे तो मिला ताला

परिजन बड़ी उम्मीद के साथ प्रसूता को लेकर पहाड़ीखेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। अस्पताल में ताला लटका हुआ था और कोई स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद नहीं था। अस्पताल बंद मिलने से परिजनों की चिंता और बढ़ गई।

मजबूरी का फायदा, ऑटो चालक ने वसूले 2000 रुपये

महिला की हालत को देखते हुए परिजनों ने तत्काल एक ऑटो किराए पर लिया। आरोप है कि ऑटो चालक ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए पहाड़ीखेड़ा से बृजपुर तक ले जाने के लिए 2000 रुपये की भारी रकम वसूल ली। परिजनों ने कहा कि उस समय महिला की जान बचाना प्राथमिकता थी, इसलिए उन्हें मजबूर होकर रकम चुकानी पड़ी।

ग्रामीणों में आक्रोश

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि समय पर एंबुलेंस और स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर उपलब्ध होते, तो गर्भवती महिला और उसके परिवार को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस गंभीर मामले में जब जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। बताया जा रहा है कि सीएमएचओ डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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