Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सहमति के बिना वैज्ञानिक जांच पर रोक

High Court

Chhattisgarh Latest News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्र और स्पष्ट सहमति के बिना उसे नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग (BEAP) या किसी अन्य वैज्ञानिक जांच के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने रायगढ़ के एक हत्या मामले में पुलिस प्रताड़ना की शिकायत पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी और उनके वैज्ञानिक परीक्षणों पर रोक लगा दी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि किसी वैज्ञानिक परीक्षण की आवश्यकता हो तो वह केवल संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र, स्पष्ट और पूरी जानकारी के साथ दी गई सहमति के आधार पर ही कराया जा सकता है। जांच एजेंसी किसी भी व्यक्ति को ऐसे परीक्षण कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

क्या है मामला?

मामला रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 238(A) के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर ग्राम बेहरापाली निवासी किसान लक्ष्मीनारायण पटेल और ग्राम महापल्ली निवासी अर्धना भगत को पूछताछ के लिए थाने बुलाया।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य है। 16 जून 2026 की जांच रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया था। इसके बावजूद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत विधिवत नोटिस जारी किए बिना उन्हें लगातार 18 दिनों तक थाने बुलाया, घंटों हिरासत में रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

मोबाइल जब्त करने और दबाव बनाने का आरोप

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस ने दबाव डालकर सुपुर्दनामा पर हस्ताक्षर कराए और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया। इसके अलावा 20 जून को जारी नोटिस के माध्यम से 22 और 23 जून को रायपुर में ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को-एनालिसिस टेस्ट के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया, जबकि इसके लिए न तो न्यायिक अनुमति ली गई थी और न ही उनकी सहमति प्राप्त की गई थी।

हाईकोर्ट ने दी राहत

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ, ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) और अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों पर रोक लगा दी। साथ ही अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि जांच के दौरान कानून का पालन किया जाए और किसी भी व्यक्ति पर उसकी इच्छा के विरुद्ध वैज्ञानिक परीक्षण कराने का दबाव न बनाया जाए। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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