Balrampur News: कारगिल के ‘परमवीर’ योगेंद्र सिंह यादव: मौत सामने थी, लेकिन तिरंगे के लिए बढ़ते रहे कदम

Chhattisgarh Balrampur News: बलरामपुर। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर पूरा देश 1999 के कारगिल युद्ध में अदम्य साहस और बलिदान का परिचय देने वाले वीर जवानों को नमन कर रहा है। इन्हीं वीर सपूतों में परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने टाइगर हिल पर जो वीरता दिखाई, वह भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे प्रेरणादायक गाथाओं में से एक मानी जाती है।

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के सामने सबसे कठिन मिशनों में से एक था टाइगर हिल पर दोबारा कब्जा करना। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस चोटी तक पहुंचने के लिए जवानों को खड़ी चट्टानों पर चढ़ना पड़ा, जबकि ऊपर से दुश्मन लगातार गोलियां बरसा रहा था। इस अभियान में सबसे आगे ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव थे। उन्होंने रस्सियों के सहारे चढ़ाई कर अपने साथियों के लिए रास्ता बनाया और दुश्मन की भारी गोलीबारी के बीच भी आगे बढ़ते रहे।

मुठभेड़ के दौरान योगेंद्र सिंह यादव के शरीर में कई गोलियां लगीं और उनका एक हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बावजूद उन्होंने घायल हाथ को बेल्ट से बांधा और दुश्मन के बंकरों पर हमला जारी रखा। उनकी बहादुरी और नेतृत्व के दम पर भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर दोबारा तिरंगा फहराया और युद्ध की दिशा बदल दी।

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहीर गांव में 10 मई 1980 को जन्मे योगेंद्र सिंह यादव को देशभक्ति विरासत में मिली। उनके पिता करण सिंह यादव भी भारतीय सेना में रह चुके थे और 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध में हिस्सा ले चुके थे। कम उम्र में सेना में भर्ती हुए योगेंद्र सिंह यादव को कारगिल युद्ध में अद्वितीय वीरता के लिए भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र प्रदान किया गया। वे इस सम्मान को प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के सैनिकों में शामिल हैं।

गौरतलब है कि 1999 में पाकिस्तान समर्थित सैनिकों और घुसपैठियों ने कारगिल, द्रास और बटालिक सेक्टर की कई रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर लिया था। इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया। लगभग दो महीने तक चले भीषण संघर्ष के बाद 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने सभी महत्वपूर्ण चोटियों पर दोबारा कब्जा कर ऐतिहासिक विजय हासिल की। तभी से हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। योगेंद्र सिंह यादव की वीरता आज भी देशवासियों के लिए साहस, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की अमिट प्रेरणा बनी हुई है।

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