रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी कथित कैश सिंडिकेट और रिश्वत की रकम के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इसी सिलसिले में ED ने विवादित अभ्यर्थियों, एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसॉर्ट संचालकों समेत करीब 30 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है।
जमानत पर बाहर आरोपितों से भी दोबारा पूछताछ
ED ने मामले में जमानत पर बाहर चल रहे कुछ आरोपितों को भी दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, टामन सोनवानी के भतीजे साहिल सोनवानी, नितेश सोनवानी, शशांक गोयल और उनकी पत्नी भूमिका कटियार समेत अन्य आरोपित शामिल हैं।
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क तैयार किया था। अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद करने और प्री परीक्षा से इंटरव्यू तक सफलता की गारंटी देने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इसके बदले अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूली गई।
CSR फंड और रिसॉर्ट के लेनदेन पर भी नजर
ED को आशंका है कि एक बड़ी कंपनी के CSR फंड का इस्तेमाल कथित तौर पर रिश्वत की रकम के भुगतान के लिए किया गया हो सकता है। जांच एजेंसी एनजीओ और रिसॉर्ट संचालकों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। फिलहाल डॉ. विकास चंद्राकर और अनिल चंद्राकर से पूछताछ जारी है। ED कथित कैश सिंडिकेट में रकम के स्रोत, उसके वितरण और इससे जुड़े लोगों के बीच संबंधों की कड़ियों को खंगाल रही है। एजेंसी की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और लोगों से पूछताछ होने की संभावना है।
