Chhattisgarh Latest News: कला-संस्कृति और रंगमंच को राष्ट्रीय पहचान, छत्तीसगढ़ के दो युवा कलाकारों को प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया

Chhattisgarh Latest News: रायपुर। छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। प्रदेश के डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू को प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दोनों कलाकारों को सम्मान प्रदान किया। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बधाई देते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया।

संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित समारोह में वर्ष 2024 और 2025 के लिए देश के 106 युवा कलाकारों को सम्मानित किया गया। इन कलाकारों ने संगीत, नृत्य, नाटक और अन्य प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। पुरस्कार के माध्यम से देश की विविध कला परंपराओं को आगे बढ़ाने वाले युवा कलाकारों की प्रतिभा और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी गई।

समारोह में राजस्थान के अकरम खान बहरूपिया को लोक नृत्य, बिहार की मनीषा श्रीवास्तव को लोक संगीत और नागालैंड के हितो किहो को वृंद संगीत के क्षेत्र में सम्मानित किया गया। वहीं, सुभाषश्री स्वैन को छऊ नृत्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा बढ़ रही है। इस बदलाव में कलाकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उन कलाकारों के योगदान को याद किया, जिन्होंने अनेक कठिनाइयों के बावजूद भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा और उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू को बधाई दी। उन्होंने लिखा, “छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और रंगमंच को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले आनंद कुमार पांडेय जी एवं घनश्याम साहू जी को प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025’ से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई! यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।”

दोनों कलाकारों को मिले इस राष्ट्रीय सम्मान से छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और रंगमंच को नई पहचान मिली है। यह उपलब्धि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और उन्हें आगे बढ़ाने वाले कलाकारों के योगदान को रेखांकित करती है।

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