Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। राजधानी में सफाई व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नगर निगम बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब शहर के नागरिक कैब की तरह अपने घर आने वाली कचरा गाड़ी की लोकेशन मोबाइल के जरिए ट्रैक कर सकेंगे। इसके लिए निगम सभी 260 कचरा वाहनों को GPS आधारित डिजिटल निगरानी प्रणाली से जोड़ रहा है। अब तक 50 से 60 वाहनों के रूट डिजिटाइज किए जा चुके हैं। अगले 15 से 20 दिनों में बाकी वाहनों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक कचरा वाहन का निर्धारित रूट और समय डिजिटल सिस्टम में दर्ज रहेगा। वाहन तय रास्ते से भटकता है, निर्धारित समय से 30 मिनट से अधिक देरी करता है या किसी स्थान पर बिना वजह 15 से 20 मिनट तक खड़ा रहता है तो सिस्टम रेड फ्लैग जारी करेगा। इसके बाद कंट्रोल रूम से संबंधित वाहन की स्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी। इस व्यवस्था के लिए इंदौर में सफाई निगरानी का काम कर रही विशेषज्ञ एजेंसी की सेवाएं ली जा रही हैं।
कचरा गाड़ी घर नहीं पहुंचने पर नागरिकों की शिकायत का समाधान अब डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा। निगम वाहन की लोकेशन और उसके निर्धारित समय की जानकारी देखकर शिकायत की वास्तविक स्थिति जांच सकेगा। निगम का दावा है कि इससे शिकायतों का निराकरण पांच मिनट में किया जा सकेगा। इसके अलावा सड़क और नाली की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें भी डिजिटल सिस्टम में अपलोड की जाएंगी, जिससे सफाई कार्य का प्रमाण उपलब्ध रहेगा।
शहर में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों की पहचान के लिए संवेदनशील जगहों पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। सफाईकर्मी भी सड़क या नाली में कचरा फेंकने वालों की तस्वीरें समय और लोकेशन के साथ अपलोड कर सकेंगे। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बार-बार कचरा देने से मना करने वाले नागरिकों की जानकारी भी कर्मचारी डिजिटल रूप से दर्ज कर सकेंगे।
खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर खत्म करने के लिए नगर निगम ने ऐसे स्थानों को उद्यान और ग्रीन कार्नर में विकसित करने की योजना बनाई है। टूरी हटरी और गुरु तेग बहादुर उद्यान में बदलाव के बाद अब सभी जोन को हर सप्ताह दो-दो स्थानों का कायाकल्प करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए जब्त पुरानी रेलिंग और लोहे के सामान का उपयोग कर बाउंड्री बनाई जा रही है। उद्यानों में पौधारोपण, पेवर ब्लॉक, लाइटिंग और बैठने की सुविधाओं को भी बेहतर किया जाएगा।
नगर निगम ने उद्यानों और रोड डिवाइडरों के रखरखाव के लिए CSR के तहत 14 नवंबर तक इच्छुक संस्थानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। औद्योगिक घरानों, अस्पतालों, मीडिया संस्थानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को उद्यान गोद देने की योजना है। इसके तहत संस्थाएं उद्यानों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने के साथ वहां अपनी ब्रांडिंग भी कर सकेंगी। उन्हें साल में 12 बड़े आयोजन करने की अनुमति देने की भी योजना है।
कचरा वाहनों के संचालन, रखरखाव और डीजल व्यवस्था को एक ही अनुबंध के तहत लाने के लिए नगर निगम मेगा टेंडर की प्रक्रिया चला रहा है। चेन्नई और भुवनेश्वर में काम कर चुकी कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। प्री-बिड से जुड़े सवालों का निराकरण होने के बाद अगले 15 से 20 दिनों में निविदाएं खोलने की तैयारी है। निगम का लक्ष्य नए साल से डिजिटल डैशबोर्ड शुरू करने का है।
नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के अनुसार, GPS आधारित निगरानी से सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और नागरिकों को कचरा गाड़ी की लोकेशन व उसके पहुंचने के समय की जानकारी मिल सकेगी। निगम का दावा है कि डिजिटल निगरानी, शिकायतों के त्वरित निराकरण और डंपिंग स्थलों के कायाकल्प से शहर की सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
