CG Assembly Mansoon Session: औद्योगिक सुरक्षा और सेफ्टी ऑडिट पर सदन में हंगामा, भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर में तीखी बहस

CG Assembly Mansoon Session: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बीते दो वर्षों में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं, सेफ्टी ऑडिट और वेदांता संयंत्र हादसे को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।

प्रश्नकाल के दौरान चरणदास महंत ने पूछा कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में कितनी औद्योगिक दुर्घटनाएं हुईं और क्या इनमें सेफ्टी ऑडिट नहीं होने की वजह सामने आई है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि दोषी इकाइयों को नोटिस जारी किए गए हैं या नहीं तथा सेफ्टी ऑडिट कितने समय में कराया जाना चाहिए।

इस पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और संचालन से जुड़े नियमों के तहत मान्यता प्राप्त एजेंसियों से नियमित सेफ्टी ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 32 कारखानों में सेफ्टी ऑडिट कराया जा चुका है और जहां यह नहीं हुआ है, वहां कार्रवाई का प्रावधान मौजूद है।

वेदांता संयंत्र हादसे का मामला भी सदन में गरमाया। नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि हादसे में केवल दो लोगों को आरोपी क्यों बनाया गया। मंत्री ने जवाब दिया कि अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई प्रक्रियाधीन है और श्रम विभाग व श्रम न्यायालय में भी प्रकरण चल रहा है।

चरणदास महंत ने पुलिस दस्तावेजों में नाम आने के बावजूद उद्योगपति अनिल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति पर सवाल किया। इस पर मंत्री ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

विधायक रामकुमार यादव ने हादसे को प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा बताते हुए पीड़ित परिवारों को घोषित सहायता राशि और बकाया भुगतान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। मंत्री ने बताया कि कंपनी की ओर से मृतकों के आश्रितों को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 5 लाख रुपये और केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता राशि देने की प्रक्रिया भी जारी है।

इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि क्या केवल इस मामले में ही कंपनी के निदेशकों पर एफआईआर दर्ज की गई है या भविष्य में ऐसे सभी मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और निदेशकों पर कार्रवाई होगी। इस मुद्दे पर भूपेश बघेल और विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

मंत्री के जवाबों से असंतुष्ट विपक्ष ने सरकार पर मामले में गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। विधानसभा में औद्योगिक सुरक्षा, सेफ्टी ऑडिट और वेदांता हादसे को लेकर हुई चर्चा दिनभर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।

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