Chhattisgarh Mahasamund News: महासमुंद। सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी से राशि काटने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त वनरक्षक मकरध्वज यादव को राहत दी है। कोर्ट ने वन विभाग की कार्रवाई को निरस्त करते हुए ग्रेच्युटी से काटी गई 1,63,464 रुपए की राशि वापस करने का आदेश दिया है।
मकरध्वज यादव महासमुंद जिले के सांकरा के रहने वाले हैं। वे 31 मार्च 2020 को वनरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद संभागीय वन अधिकारी, महासमुंद ने वेतन निर्धारण में गलती का हवाला देते हुए उनकी ग्रेच्युटी से 1,63,464 रुपए की कटौती कर ली थी। राशि वापस लेने के लिए यादव ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई आवेदन दिए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
इसके बाद उन्होंने स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर विभाग के आदेश को चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 की धारा 4(6)(a) और 4(6)(b) में ग्रेच्युटी की जब्ती के लिए परिस्थितियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। इन परिस्थितियों के बिना सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी से राशि काटना कानून के अनुरूप नहीं है। वहीं राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए विभागीय कटौती को सही बताया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और मामले से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि मकरध्वज यादव की सेवाएं धारा 4(6)(a) या 4(6)(b) में बताई गई किसी परिस्थिति के आधार पर समाप्त नहीं की गई थीं। ऐसे में उनकी ग्रेच्युटी से राशि वसूलने के लिए कानून में आवश्यक आधार मौजूद नहीं था।
हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल 2020 को जारी विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही वन विभाग को ग्रेच्युटी से काटी गई 1,63,464 रुपए की राशि मकरध्वज यादव को वापस करने का निर्देश दिया।
इस फैसले को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि ग्रेच्युटी से राशि की कटौती मनमाने तरीके से नहीं की जा सकती। ग्रेच्युटी कर्मचारी को कानून के तहत मिलने वाला वैधानिक लाभ है और इसकी जब्ती या कटौती के लिए संबंधित कानून में निर्धारित शर्तों और प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यानी सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में गलती सामने आने मात्र से कर्मचारी की ग्रेच्युटी से वसूली नहीं की जा सकती, जब तक कानून में निर्धारित परिस्थितियां और प्रक्रिया पूरी न हों।
