छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फायर सेफ्टी को लेकर बड़ा फैसला, कोचिंग, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की होगी जांच, 10 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

High Court

CG High Court on Fire Safety: बिलासपुर। लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा है कि केवल टेंडर जारी करने से व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीदी से जुड़े सभी टेंडरों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट राज्य सरकार से तलब की है। वहीं जिला प्रशासन ने भी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों की व्यापक जांच के लिए विशेष कमेटियों का गठन कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सरकार केवल टेंडर प्रक्रिया का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्क ऑर्डर जारी होने और कार्य शुरू होने की स्थिति भी सामने आनी चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को फायर ब्रिगेड के वाहनों और उपकरणों की खरीदी की अद्यतन स्थिति शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।

दरअसल, वर्ष 2020 में कई नए फायर स्टेशन बनाने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी कई जिलों में उपयुक्त जमीन का चयन नहीं हो सका। हाल ही में बिलासपुर के मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब-स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आया। मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू की।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश में 72 करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से आधुनिक फायर उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया जारी है। साथ ही 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि, कई जिलों में अब तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। वर्तमान में गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर में जमीन उपलब्ध होने के बाद निर्माण के लिए राशि जारी कर दी गई है, जबकि मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बीजापुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सुकमा, नारायणपुर समेत 11 जिलों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया अभी भी लंबित है।

इधर, लखनऊ अग्निकांड के बाद बिलासपुर जिला प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट हो गया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिले के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा जांच के लिए जिला एवं अनुविभाग स्तर पर कमेटियां गठित की गई हैं। जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता एसडीएम मनीष साहू करेंगे। समिति में नगर निगम के अपर आयुक्त, कोतवाली एवं सिविल लाइन सीएसपी, जिला सेनानी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के संयुक्त संचालक को सदस्य बनाया गया है। वहीं प्रत्येक अनुविभाग में एसडीएम की अध्यक्षता में अलग-अलग जांच दल गठित किए गए हैं, जिनमें एसडीओपी, सीएमओ, थाना प्रभारी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे।

प्रशासन ने सभी समितियों को 10 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और सुरक्षा मानकों का पालन प्रमुख आधार होगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं मिलेंगी, उन्हें पहले सुधार का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं होने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हाल ही में नगर निगम ने छह कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान एक कोचिंग संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही गेट होने के कारण उसे सील कर दिया गया, जबकि पांच अन्य संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों की वास्तविक संख्या का कोई समेकित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अब जांच का मुख्य आधार फायर विभाग के फायर ऑडिट रिकॉर्ड को बनाया गया है। जिन संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी नहीं ली है या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया है, वहां जांच दल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

हाईकोर्ट की सख्ती और प्रशासन की सक्रियता के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर व्यापक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी अग्निकांड की स्थिति में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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