Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। बहुचर्चित सर्पदंश प्रकरण में तीन लिपिकों की गिरफ्तारी को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि पुलिस ने पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिना प्रारंभिक जांच और पर्याप्त तथ्यात्मक परीक्षण के तीनों कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले में संघ ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी द्वारा जारी ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय के 13 जून 2010 के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी शासकीय कर्मचारी या लोकसेवक के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच और संबंधित विभाग से तथ्यात्मक जानकारी लेना आवश्यक है। संघ का दावा है कि इस मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और बिना पर्याप्त जांच के गिरफ्तारी कर दी गई।
ज्ञापन में पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने, प्रक्रिया में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने तथा गिरफ्तार लिपिकों को नियमानुसार राहत देने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों में पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
प्रदेश लिपिक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल इस मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
