Chhattisgarh Mungeli News: मुंगेली। पत्रकारिता लोकतंत्र का मजबूत प्रहरी है, लेकिन इसी पहचान की आड़ में कथित दबाव, वसूली, ब्लैकमेलिंग या अन्य अनुचित गतिविधियों के आरोप सामने आने पर मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। मुंगेली जिले में इसी मुद्दे को लेकर पत्रकारों ने प्रशासन और पुलिस तक अपनी मांग पहुंचाई है।
मुंगेली प्रेस क्लब के बैनर तले पत्रकारों ने पत्रकारिता की आड़ में कथित अवैध वसूली और अन्य गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर तीन अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। प्रेस क्लब अध्यक्ष अनिल सोनी के संयोजन में पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से मिला। इस दौरान पत्रकारिता की विश्वसनीयता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को अधिकारियों के सामने रखा गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम पहला ज्ञापन एडीएम निष्ठा पाण्डेय तिवारी को सौंपा गया। इसमें पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता निर्धारित करने की मांग की गई। प्रेस क्लब का कहना है कि वर्तमान समय में पत्रकारिता या डिजिटल मीडिया से जुड़ने के लिए स्पष्ट न्यूनतम योग्यता और एक समान सत्यापन व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार ऐसे लोग भी मीडिया के नाम से सक्रिय हो जाते हैं, जिनकी कार्यप्रणाली से पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
एडीएम को ही सौंपे गए दूसरे ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग की पत्रकार सूची के सत्यापन के साथ पुलिस वेरिफिकेशन की मांग की गई। पत्रकारों का कहना है कि उचित सत्यापन व्यवस्था से मीडिया की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वालों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
तीसरा ज्ञापन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम एडिशनल एसपी प्रशांत शुक्ला को सौंपा गया। इसमें कुछ तथाकथित पत्रकारों पर जिले के पत्रकारों और अधिकारियों के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल करने, दबाव बनाने और कथित ब्लैकमेलिंग करने के आरोप लगाए गए हैं। प्रेस क्लब ने पुलिस से मांग की है कि शिकायत में बताए गए मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाए जाएं। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
प्रेस क्लब से जुड़े पत्रकारों ने कहा कि वे पत्रकारिता की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, लेकिन स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और जवाबदेही भी जरूरी है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित के मुद्दों को सामने लाना, आम लोगों की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और व्यवस्था को जवाबदेह बनाना है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति मीडिया की पहचान का इस्तेमाल निजी हित, अनुचित दबाव या कथित वसूली जैसे मामलों के लिए करता है तो इससे पूरी पत्रकार बिरादरी की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
