संगठन ने ज्ञापन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि द्वारा प्रदर्शनरत छात्र-छात्राओं और युवाओं के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ समाज में गलत संदेश देता है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कंगना रनौत ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच पर दिए गए अपने कथित बयान में Gen-Z पीढ़ी की परवरिश पर सवाल उठाते हुए उन्हें “गट्ठर छाप परवरिश” जैसी टिप्पणी से संबोधित किया। संगठन का कहना है कि यदि ऐसा बयान दिया गया है तो यह युवाओं, छात्र-छात्राओं और महिलाओं की गरिमा के प्रतिकूल है तथा इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मानवाधिकार न्याय सुरक्षा संगठन की प्रदेश अध्यक्ष पूनम पांडेय ने मांग की कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक होने पर FIR दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए।
पूनम पांडेय ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो संगठन न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे।
