Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या से जुड़े मामले में डॉक्टर पति को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में पेश साक्ष्यों और बच्चों की गवाही को महत्वपूर्ण मानते हुए पति की भूमिका पर विचार किया। कोर्ट ने डॉक्टर को शेष सजा भुगतने के लिए 10 दिसंबर 2026 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। डॉक्टर पहले ही एक साल, दो महीने और 14 दिन जेल में बिता चुका है। अदालत ने जेल में बिताई गई इस अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान डॉक्टर के अधिवक्ता ने उसकी उम्र करीब 50 वर्ष होने और परिवार की जिम्मेदारी उसी पर होने का हवाला देते हुए राहत देने की दलील दी। वहीं, मृतका के भाई आशीष नाथ के अधिवक्ता ने सजा कम करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पति की कथित प्रताड़ना के कारण महिला ने आत्महत्या की, इसलिए उसे अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। राज्य शासन ने भी इस पक्ष का समर्थन किया। हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और इसी घटना से जुड़े भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत डॉक्टर की दोषसिद्धि को ध्यान में रखा। उस मामले में भी उसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी।
मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां रहने वाली रश्मि प्रकाश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के भाई आशीष नाथ ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि डॉ. संजय प्रकाश की हिंसा और प्रताड़ना के कारण उनकी बहन ने यह कदम उठाया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 28 जून 2016 को दिए फैसले में डॉक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत तीन साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ डॉक्टर ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मृतका के बेटे, बेटी और माता-पिता के बयानों का परीक्षण किया। बच्चों ने अदालत को बताया कि उनके पिता का क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स के साथ कथित तौर पर अवैध संबंध था। उनके अनुसार, मां ने इसका विरोध किया तो पिता ने पहले चाबी फेंककर मारी और फिर मारपीट की। बच्चों ने यह भी बयान दिया कि मां को पानी में घोलकर नींद की गोलियां दी गई थीं, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई थी। उन्होंने घटना से एक दिन पहले भी मां के साथ मारपीट किए जाने और पिता की ओर से तलाक देकर नर्स से शादी करने की धमकी दिए जाने की बात कही। अदालत ने इन बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए मामले में फैसला सुनाया।
